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अमृत

amrit
संस्कृतसंज्ञापुल्लिंग वह वस्तु जिसके पीने से जीव अमर हो जाता है

हिंदी अर्थ

  1. 1संस्कृत ; विशेषण जो मरा न हो जीता हुआ या जिसमें प्राण हो जो मरणशील न हो अमरत्व प्रदान करनेवाला अविनश्वर, शाश्वत प्रिय, अभीष्ट, सुंदर

English Meaning

Noun, Masculine nectar

बोलियों में अर्थ (Dialect Meanings)

ब्रज
पुल्लिंग दे० 'अमृत' उदाहरण . हरि कह्यौ साग-पत्र मोहि अति प्रिय, अम्रित ता सम नाहीं। सूर १/२४१६५ अमृतबान , अमृतदान , मर्तबान , लाह का रोगन किया हुआ मिट्टी का एक प्रकार का ढक्कनदार बरतन जिसमें अचार घी इत्यादि रखते हैं; विशेषण, पुल्लिंग जो मृत या मरा हुआ न हो, अर्थात् जीवित कभी न मरने वाला, अमर अविनाशी परम प्रिय और सुन्दर एक प्रसिद्ध कल्पित पदार्थ जिसके सम्बन्ध में यह कहा जाता है कि इसके सेवन से प्राणी सदा के लिए अमर हो जाता है , पीयूष , सुधा परम स्वादिष्ट अथवा बहुत अधिक गुणकारी पदार्थ सोम का रस ; जल, पानी स्वर्ग दूध घी अनाज, अन्न यज्ञ की बची हुई सामग्री १०. मुक्ति , मोक्ष ११. औषध , दवा १२. जहर १३. पारा १४. धन-संपत्ति १५. सोना, स्वर्ण १६. रहस्य सम्प्रदाय में—(क) ईश्वर या परमात्मा, (ख) ईश्वर के प्रति होने वाला अनुराग या प्रेम , (ग) गुरु का सदुपदेश , (घ) तालु-मूल में स्थित चन्द्रमा से निकलने वाला रस, जो योगी जीभ उलटकर पीता है १७. देवता १८. शिव १६. विष्णु २०. धन्वन्तरि
मालवी
विशेषण अमृत जिसे पीकर देवता अमर हो गये थे
अवधी
संज्ञा अमृत; विशेषण बहुत मीठा
बज्जिका
संज्ञा अमृत
बुन्देली
संज्ञा, पुल्लिंग अमृत उदाहरण . उदा. दुदुवन सीचों मइया बेला हो चमेली, इमरत से लाल अनार हो माय-माता के भजन।
हरियाणवी
संज्ञा, पुल्लिंग दे. अमरित
मैथिली
संज्ञा सुधा, पीयूष; Noun ambrosia, nectar, divine beverage.

शब्द जानकारी

उत्पत्तिसंस्कृत
प्रकारसंज्ञा
लिंगपुल्लिंग वह वस्तु जिसके पीने से जीव अमर हो जाता है
दृश्य1

संबंधित शब्द

अमन

संस्कृत ; संज्ञा, पुल्लिंग अनुभूति का न होना, अनुभूति का अभाव ज्ञानाभाव

अमन-चैन
कला
कलाई
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ओसर

हिंदी ; संज्ञा, स्त्रीलिंग 'ओसरिया' पहली बार गर्भ धारण करने योग्य गाय या भैंस उदाहरण . रामू की बछिया अब ओसर हो गई है ।

अस्त

संस्कृत ; संज्ञा, पुल्लिंग तिरोधान , लोप , अदर्शन, जैसे-सूर्यास्त के पहले आ जाना (शब्द॰) पश्चिम मेरु (जिसके पीछे सूर्य डूबता है) [को॰] आवास , घर [को॰] समाप्ति , मृत्यु [को॰] —सूर्यास्त , शुक्रास्त , अस्तंगत विशेष . सब ग्रह अपने उदय के लग्न से सातवें लग्न पर अस्त होते हैं । इसी से कुंडली में सातवें घर की संज्ञा 'अस्त' है । बुध को छोड़कर अन्य ग्रह जब सूर्य के साथ होते हैं, तब अस्त कहे जाते हैं ।

कलाल
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